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Sunday, 6 March 2016

अहमदाबाद से सोमनाथ और देवालिया सफारी पार्क

१८ फरवरी को वृन्दावन से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन आ गया l वहाँ से दोपहर साढ़े तीन बजे अहमदाबाद के लिये आश्रम एक्सप्रेस पकड़ी l ये गुजरात की मेरी ११ साल बाद कोई यात्रा थी l इससे पूर्व २००५ में अहमदाबाद आया था भारत पाकिस्तान का मैच देखने l यहाँ मेरी बड़ी दीदी रहती है l उस समय की एक घटना अभी भी याद है l हुआ ये था की उस समय पहले पटना से सूरत ट्रेन से सूरत आया था रात के करीब ११ बजे और दुसरे ट्रेन से फिर अहमदाबाद जा रहा था l मेरे जीजाजी भी साथ थे l सुबह के करीब ४ या ५ बज चुके थे l वे रेलवे में हैं l उस समय वे लोग मणिनगर के रेलवे कॉलोनी में रेलवे क्वाटर में रहते थे l मणिनगर स्टेशन अहमदाबाद स्टेशन से पहले पड़ता है l अब रात के समय ट्रेन बदलने से नींद कहाँ आती है l तो उस ट्रेन का यहाँ stopage भी नहीं है लेकिन ट्रेन अक्सर यहाँ धीमी हो जाती है या रुक भी जाती है कुछ देर के लिये l तो मेरे जीजाजी आराम से नीचे उतर गये l और मैं सीधे डिब्बे के कूद पड़ा उससे मेरा पैर छिला गया l असल बात ये थी की मुझे जोर से नींद आ रही थी और जहाँ कूदा वहाँ से पास में घर थी २ मिनट के रास्ते पर l अहमदाबाद स्टेशन जाने पर यहाँ वापस आने में डेढ़ घंटे से ज्यादा समय लगता l कई लोगों ने मुझे दुबारा ऐसा न करने की हिदायत दी l
इस बार मैं दुसरे रास्ते से अहमदाबाद पहुँच रहा था l इस बार साबरमती स्टेशन पहले पड़ता था l तो मुझे फोन पर जीजाजी ने साबरमती स्टेशन पर ही उतरने को कहाँ l क्योंकि वहाँ से उनका घर ज्यादा नजदीक पड़ता l ट्रेन समय से १५ मिनट पूर्व करीब सुबह ६.२० में ही साबरमती स्टेशन पहुँच गयी l मुझे लेने उन्होंने अपने एक ऑफिस स्टाफ थॉमस को भेजा था l थोड़ी देर बाद वे खुद भी पहुँच गये l वे मोर्निंग वाक करते हुए पैदल ही स्टेशन आ गये थे l थोड़ी देर बाद गाडी लेकर ड्राईवर भी आ गये l फिर हम घर आ गये l
पीछले बार जब यहाँ आया था तो यहाँ के स्वामीनारायण मन्दिर तथा इस्कोन मन्दिर गया था l इस बार कही जाने की इच्छा नहीं थी l मुझे सोमनाथ के लिये अगले दिन रात को निकलना था l अगले दिन दीदी ने दिन में घर पर सुन्दरकाण्ड का पाठ रखा था l यहाँ के विषय में कुछ विशेष लिखने योग्य नहीं है l यहाँ आना अपने घर पर आने के तरह ही था l मेरी इधर की यात्रा का टिकट जीजाजी ने ही करवाया था l यद्यपि मैंने कह दिया था की मुझे स्लीपर से यात्रा करने में भी कोई असुविधा नहीं है फिर भी उन्होंने थर्ड ऐसी में करवाया था l क्योंकि अहमदाबाद से सोमनाथ, सोमनाथ से द्वारका और द्वारका से वापस अहमदाबाद आने में प्रत्येक जगह ८ से ९ घंटे लगते है l
अहमदाबाद आकर ये बदलाव था की जहाँ हरिद्वार और वृन्दावन में स्वेटर पहनना पड़ रहा था यहाँ गर्मी थी l यहाँ पंखा चल रहा था l अप्रैल मई जैसी गर्मी तो नहीं हाँ होली के समय जैसा मौसम उत्तर भारत में रहता है कुछ उसी प्रकार का मौसम था l यहाँ सूर्योदय और सूर्यास्त भी करीब ४५ मिनट देर से होता था अतः सुबह उठने में देर हो जाती थी l
अगले दिन दोपहर करीब ३ बजे से सुन्दरकाण्ड का पाठ आरम्भ हुआ l ५-६ लोगों की मण्डली आयी थी l ये सामूहिक पाठ था l धीरे-धीरे लोग आते गये l करीब पौने २ घंटे पाठ चला l वे लोग बीच-बीच में शुर लगाकर पाठ कर रहे थे l मैंने भी सबके साथ पाठ में भाग लिया l ये आयोजन बहुत अच्छा रहा l ६० के करीब लोग आये l सुन्दरकाण्ड का पाठ समाप्त होनेपर सबको प्रसाद और नाश्ता देकर विदा किया गया l वैसे उनके कुछ परिचित लोग रात तक आये l
रात को करीब १० बजे मेरी ट्रेन थी l मेरा टिकट कन्फर्म नहीं थी l vip कोटे से उसे कन्फर्म करवाया गया l करीब ९ बजे ड्राईवर आया l आधा घंटे में हम स्टेशन पहुँच गये l २ लोग मुझे साथ छोड़ने ट्रेन में गये l
ट्रेन में मुझे कुछ विशेष करना था नहीं l घरसे खाकर चला था l जाकर सो गया l ट्रेन को सुबह करीब साढ़े ६ बजे विरावल स्टेशन पहुँचना था l वहाँ से सोमनाथ स्टेशन करीब ५ किलोमीटर है l ट्रेन समय से विरावल स्टेशन पहुँच गया l वहाँ भी मुझे लेने स्टेशन पर एक व्यक्ति आया था l जीजाजी ने यहाँ के एक ठेकेदार दिनेश भाई से बात कर मेरे लिये यहाँ घुमने के लिये गाडी का इंतजाम करवा दिया था l और मेरे लिये सोमनाथ स्टेशन पर रेलवे के ऑफिसर रेस्ट हाउस में रूम बुक करवा दिया था l दिनेश भाई ने मुझे फ़ोन पर ड्राईवर का नम्बर दे दिया था l वे खुद व्यस्त होने की वजह से नहीं आ पाये थे l

ड्राईवर का नाम अमर भाई था l मैंने उनको फ़ोन लगाया तो वे गाड़ी लेकर स्टेशन के बाहर खड़े थे l वहाँ से निकलकर हम सोमनाथ स्टेशन पहुँचे l स्टेशन के ऊपर ही ऑफिसर रेस्ट हाउस है l करीब ७ बजे हम वहाँ पहुँच गये l रास्ते में उनका कथन था की ये बेकार स्टेशन है l ये सुनसान रहता है l दिन भर में कोई कोई ट्रेन आती है l असल में मैंने ये सोचकर सोमनाथ स्टेशन के रेस्ट हाउस में रूम बुक करवाया था की मन्दिर यहाँ से पास पड़ेगा और रात को ट्रेन भी यही से पकड़ना था वरना विरावल स्टेशन पर भी रूम बुक हो सकता था l
सोमनाथ स्टेशन के ऊपर में बने रेस्ट हाउस के केयर टेकर से मिला l उसने मुझे कमरा दे दिया l यहाँ लेकिन एक अजीब बात थी की केयर टेकर का कहना था बाहर जाते समय कमरे की चाभी देकर जाये l जब मैंने अमर भाई से पूछा की ऐसा यहाँ क्यों हैं तो उनका कहना था की कमरे की एक ही चाभी रहती है इनके पास खो जाने पर ताला तोड़ना पड़ता है इसलिये l हालाँकि ऐसा मैंने और जगह के रेस्ट हाउस में नहीं देखा l
१ घंटे बाद फ्रेश आदि होकर करीब सवा आठ बजे सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने निकल पड़ा l उस परिसर में दो मन्दिर है l जो नया मन्दिर है उसका जीर्णोधार लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल और राजेन्द्र प्रसाद ने करवाया था नेहरु और गाँधी के विरोध के वावजूद l और पुराना मन्दिर का पुनर्निर्माण संभवतः सत्रहवी सताब्दी में करवाया गया था जैसा पुजारी जी ने बतलाया था l पुराने मन्दिर में स्थित शिवलिंग ही ज्योतिर्लिंग है क्योंकि ज्योतिर्लिंग वह है जो स्वतः प्रकट हुआ है l
वहाँ पहुँचकर अमर भाई ने गाडी को पार्किंग में लगाया और मैं पहले नये मन्दिर के दर्शन करने चला गया l वहाँ मोबाइल, कैमरा आदि लेकर जाने की इजाजत नहीं थी l अतः मैंने गाड़ी में ही इसे छोड़ दिया l सुरक्षा जाँच से होकर अन्दर पहुँचा l अन्दर पूजा नहीं होती थी सिर्फ लाइन से जाकर शिवलिंग के दर्शन करने होते थे l दर्शन करके फिर प्रसाद काउंटर से २० रुपये का हलवा का प्रसाद लिया l परिसर बड़ा था l अन्दर छोटे-छोटे ३-४ अन्य मन्दिर भी बने थे l उनके भी दर्शन किये l इसके अलावा भी द्वादश ज्योतिर्लिंग के बारे में सचित्र वर्णन था जाकर उसे भी देखा l
बाहर निकलनेपर मुझे अब अमर भाई को खोजने में परेशानी होने लगी क्योंकि मैं गाडी को ठीक से पहचानता भी नहीं था l और मोबाइल भी गाडी में था l बगल में बस अड्डा था वहाँ भी जाकर देख आया l फिर वापस उसी पार्किंग में आया तो अमर भाई ने खुद मुझे खोजा l फिर बात होने लगी पुराने मन्दिर में पूजा की तो ये बोले की ये एक परिचित पुजारी को जानते है l मैंने दिनेश भाई से पहले ही पुजारी के लिये कह रखा था l अतः उनसे पहले पूछ ही लेना मैंने उचित समझा l क्योंकि रात में उन्होंने मुझसे इस विषय में पूछा था तो मैंने कहा था की हाँ पूजा करवाऊंगा l वैसे भी मुझे कहाँ बार-बार सोमनाथ आना था l मैंने फ़ोन किया तो उन्होंने अपने परिचित पुजारी को कहा वे व्यस्त थे अतः उन्होंने दुसरे पुजारी को भेज दिया l उनके साथ मैं पूजा करने पहुँचा l हम जल, दूध, फूल और बेलपत्र आदि लेकर मन्दिर में पहुँचे l पहले उन्होंने संकल्प करवाया फिर अच्छा से शिवलिंग पर बारी बारी से जल, फूल, बेलपत्र और दूध से पूजा करवाया l मैं पूजा से पूरी तौर पर संतुष्ट हुआ l मैंने अपना तथा एक अन्य व्यक्ति जिसने मुझे कहा था उनका भी पूजा उनसे करवाया l उन्हें ५०० दक्षिणा दी l हालाँकि वे ज्यादा चाह रहे थे l मैंने पहले ही इस बारे जिस पुजारी जी ने इन्हें भेजा था और अमर भाई से समझ लिया था की कितना देना उचित होगा l
वहाँ से निकलकर मैं समुन्द्र तट देखने गया जोकि बगल में ही था l फोटो आदि खींचकर फिर जाकर हमने पास के होटल में खाना खाया l मैंने आलु पराँठा खाया जबकि अमर भाई ने ढोकला और इडली l
फिर वहाँ से हम सोमनाथ के अन्य ऐतिहासिक स्थलों को देखने चल पड़े l पहले गोलोकधाम गये l यहाँ श्री गीता मन्दिर बना हुआ है l यहीं पर भगवान् कृष्ण अपनी लीला को पूर्ण कर अदृश्य हो गये थे l मन्दिर में गीता के श्लोक भी लिखे थे दीवार के मार्बल पर l यहाँ भी कुछ अन्य मन्दिर भी बने थे l
इसके बाद हम हिरण, कपिला और सरस्वती के त्रिवेणी संगम पर गये l इस स्थान पर स्नान का बहुत महात्म्य है l
इसके बाद हम भालका तीर्थ मन्दिर है l इसी स्थानपर पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान में बैठे भगवान् श्रीकृष्ण के दाहिने पाँव की तलह में जरा नामक व्याध ने मृग का मुख समझकर तीर मारा था l जब व्याध ने उनसे क्षमा माँगी तो भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा की ये मेरी इच्छा से हुआ है l
रास्ते में बहुत सी नावें समुन्द्र में कतार से लगी थी l इसके बारे में अमर भाई का कहना था की ये सब नाव मछली मारने के काम आती है l उनका कहना था की एक नाव बनाने में ६०-७० लाख खर्च आता है l और ऐसी यहाँ ७००० नाव है l बाकायदा वहाँ मछली की कई फैक्ट्री बनी हुई थी l वहाँ मछली की काफी गंध आ रही थी l
फिर वे हमें समुन्द्र के किनारे स्थित एक शिवलिंग दिखाने ले गये जिसे समुन्द्र अपने लहर से जल चढ़ाता था वह स्वतः निर्मित है संभवतः l
वहाँ से वापस करीब साढ़े ११ बजे वापस रेस्ट हाउस के कमरे में आ गया l आकर फिर आराम करने लगा l फिर मुझे २ घंटे बाद देवालिया सफारी पार्क जाना था l वहाँ की विशेषता ये है की यहाँ हिरण, बारहसिंघा, शेर, लोमड़ी आदि को प्राकृतिक रूप से खुले में रखा जाता है l डेढ़ बजे इसलिये निकलना था क्योंकि सोमनाथ से वहाँ की दुरी करीब ५० किलोमीटर है l और ३ बजे से बस में बैठाकर वहाँ घुमाया जाता है l रास्ते में जाते समय कही-कही बस्ती थी और कही-कही बिल्कुल सुनसान जंगल था l रास्ते में कोई पैदल चलता नहीं मिला l इसकी वजह अमर भाई ने ये बतलायी कि जंगल से जानवर आकर हमला कर सकते है इसलिये इधर कोई पैदल नहीं चलता l वह जंगल बहुत दूर तक फैला था l हम जिस मार्ग से जा रहे थे उधर तो था ही दुसरे तरफ भी फैला था l रास्ते में अलग-अलग होटलों के बोर्ड थे जो काफी महंगे थे l अमर भाई ने बतलाया उन होटलों का एक दिन का चार्ज १० हजार, १५ हजार इस तरह से होगा l अप्रैल आदि के समय सब भर जाते है l
सोमनाथ से वहाँ पहुँचने में करीब १ घंटा लगा होगा l इसकी वजह ये थी की वहाँ की सड़के काफी शानदार है कही भी टूटी फूटी नहीं है l देवरिया सफारी पार्क में पहुँचकर टिकट लिया l वहाँ कोई विशेष भीड़ नहीं थी l दस मिनट के अन्दर मुझे टिकट मिल गया l टिकट का दाम १९० था l सोमवार से शुकवार रेट १५० था जबकि शनिवार और रविवार को १९० l बुधवार को पार्क बंद रहता था l उस दिन रविवार था l
थोड़ी देर बाद जिस बस में मेरा सीट था वह आ गई l जाकर अपनी सीट पर बैठ गया l ५ मिनट के अन्दर सब लोग आ गये फिर बस चल पड़ी l बस ने हमें करीब ४५ मिनट तक घुमाया l हमें रास्ते में हिरण, बरसिंघा, भेड़िया, शेर और बाघ आदि नजर आये l जहाँ भी कोई जानवर नजर आता l बस वहाँ पर थोड़ी देर के लिये रोक दिया जाता था l और सब लोग फोटो ले लेते फिर फिर बस चल पड़ती l इस प्रकार यहाँ का सफ़र रहा l मुझसे पूछा जाय तो मेरे विचार से सिर्फ इतने देर के लिये टिकट का ये रेट बहुत अधिक है फिर भी एक बार जाने के लिये ठीक है l बार-बार जाने के लायक मेरे समझ से नहीं है l टिकट के अधिक रेट के बारे में कुछ लोगों ने मुझसे कहा की zoo के मुकाबले यहाँ रखरखाव में ज्यादा खर्च है और यहाँ जानवर को प्राकृतिक रूप से रखा जाता है l
खैर वहाँ से घूमकर फोटो आदि लेकर अब हम वापास चल पड़े l रास्ते में एक जगह अमर भाई चाय पीने गये और मैंने नारियल पानी पिया l फिर आधा किलो बेर लेकर रास्ते भर खाता आया l बेर उतना अच्छा नहीं था l ज्यादा पक चुका था l रास्ते के बारे में अमर भाई बताते रहते थे l रास्ते में खूब आम के पेड़ थे l उनका कथन था की एक-एक व्यक्ति का कई-कई बीघा में आम है l उस समय भी बाजार में कच्चे आम बिक रहे थे जोकि अभी महंगे थे शुरुआती सीजन के होने की वजह से l पहले मुझे लगा था की शायद वे सब जंगली पेड़ हैं l रास्ते में उन्होंने चीनी की फैक्ट्री भी दिखलायी l उसके आस-पास बहुत सा गन्ना का पौधा था l रास्ते में नारियल के पेड़ भी काफी थे l            
       इस प्रकार सब जगह से घूमकर शाम को करीब साढ़े ५ बजे अमर भाई से विदा लेकर वापस सोमनाथ स्टेशन के रूम में आ गया l अब मुझे सोमनाथ में कही नहीं जाना था l इस ब्लॉग के माध्यम से दिनेश भाई और अमर भाई का बहुत-बहुत धन्यवाद व्यक्त करता हूँ l उनके वजह से मैं सोमनाथ में इतने आराम से इतने जगहों पर घूम पाया l    
रात को करीब ७ बजे अमर भाई ने स्टेशन के थोड़ी दूर जो होटल बतलाया था वहाँ खाने गया l वहाँ भी मैंने आलु का पराँठा खाया l जोकि ६० रुपये का था l अन्य जगहों के मुकाबले थोड़ा महँगा l
मेरी ट्रेन रात को ११ बजे थी l दिन में जो केयरटेकर था वह जा चुका था l उसने बतलाया था की वह अकेले ३ दिन से यहाँ पर है(मतलब २४ घंटे लगातार)  उसे छुटी नहीं मिल पा रही है l आज शाम को दूसरा आदमी आएगा तब वह जायेगा l रात को दूसरा केयरटेकर आ चुका था l मैंने उससे बात करके रजिस्टर में इंट्री करवाया l वह थोड़ा मुर्ख था उसे पता नहीं था की क्या-क्या भरना है l यहाँ रूम चार्ज २१० था एक दिन का जो मुझे थोड़ा ज्यादा लगा l बाद में जीजाजी से पूछने पर उन्होंने बतलाया की रेलवे के ऑफिसर रेस्ट हाउस का कोई फिक्स चार्ज नहीं है l हर स्टेशन का अलग-अलग है कहीं ५० से भी कम है l कही १०० कही २०० तो कही ४०० भी है l
ये करने के बाद वह मुझसे चाय पानी के लिये माँगने लगा l चूँकि मेरे हिसाब से रूम का अधिक चार्ज लगा था भले वह ac रूम था अतः मेरी देने की कोई इच्छा नहीं थी l फिर भी उसे २० रुपये दे दिये l वह भी बडबडा रहा था मेरो को २० रुपया दिया l

अब आगे की और अंतिम चरण की मेरी यात्रा द्वारका की होने वाली थी जिसका वर्णन अगले पोस्ट में किया जायेगा l            

अहमदाबाद में सुन्दरकाण्ड पाठ 

सुन्दरकाण्ड पाठ  


अहमदाबाद में इस कमरे में ठहरा था 

सोमनाथ के पुराने मन्दिर में स्थित  शिवलिंग मैंने यहाँ पूजा की थी 

मुझे पूजा करवाने वाले पुजारी 

गुमनाम मुसाफिर पुजारी जी के साथ 

समुन्द्र 


सोमनाथ का मुख्य मन्दिर इसका ही जीर्णोधार लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया था 

श्री गीता मन्दिर 

मन्दिर के अन्दर दीवार पर गीता के श्लोक 



समुन्द्र 

गोलोकधाम परिसर में बना एक अन्य मन्दिर, यहाँ महाप्रभु की बैठक बतलाई जाती है  



त्रिवेणी संगम 

भालका तीर्थ मन्दिर 




मछली पकड़ने के लिये नावों की कतार 

इस शिवलिंग को समुन्द्र आकर जल चढ़ाता है l 

दूर से सोमनाथ मन्दिर का नजारा 

मछली पकड़ने की एक नाव पास से 

सोमनाथ का एक अन्य मन्दिर 

सोमनाथ स्टेशन दिन में 

देवालिया सफारी पार्क की तरफ जाते हुए 

पार्क के अन्दर 


बस 


बारहसिंघा 

हिरण 



शेर लेटा हुआ 

एक शेर लेटा हुआ एक उठा हुआ 







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हमें घुमाने वाली बस 

मगरमछ 

अमर भाई सफ़ेद शर्ट में 

पार्क से वापस लौटते हुए 






सोमनाथ स्टेशन रात में 

सोमनाथ में इसी कमरे में रुका था